इस देश में अक्‍सर मिलिट्री लोकतंत्र पर हावी रही है तख्तापलट छाता पकड़ने वाले ने किया देश पर कब्जा
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इस देश में अक्‍सर मिलिट्री लोकतंत्र पर हावी रही है तख्तापलट छाता पकड़ने वाले ने किया देश पर कब्जा

पश्चिमी अफ्रीकी देश गिनी में रविवार को भारी उथल-पुथल के बीच सेना ने तख्तापलट का ऐलान करते हुए देश के राष्‍ट्रपति अल्‍फा कोंडे को गिरफ्ता,र कर लिया।मिलिट्री की तरफ से कहा गया है कि प्रांत के गर्वनर्स की जगह अब रीजनल कमांडर्स शासन की जिम्‍मेदारी लेंगे। गिनी में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है और इस देश में अक्‍सर मिलिट्री लोकतंत्र पर हावी रही है।

गिनी में तख्तापलट के पीछे लेफ्टिनेंट कर्नल मामादी डौंबुया को जिम्‍मेदार माना जा रहा है । गिनी के तख्‍तापलट ने हर किसी को हैरान कर दिया है। बागियों का नेतृत्व कर रहे कर्नल ममादी ने देश के सभी बॉर्डर को बंद करने का आदेश दिया है। कर्नल ममादी के तख्तापलट के फैसले पर हैरानी इसलिए जताई जा रही है क्योंकि ममादी बीते 12 सालों से राष्ट्रपति के वफादार रहे हैं। ऐसी कई तस्वीरें हैं जिसमें ममादी को राष्ट्रपति के पीछे छाता लेकर खड़े देखा जा सकता है।

धीरे-धीरे लोकतंत्र की तरफ बढ़ रहा यह देश अब फिर से गुलाम परंपरा की तरफ लौट गया है। मिलिट्री की तरफ से कोंडे को कब रिहा किया जाएगा, इस बारे में कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया गया है। हालांकि मिलिट्री ने बताया है कि 83 साल के राष्‍ट्रपति को मेडिकल केयर के साथ ही उनके डॉक्‍टरों की मदद मुहैया कराई जा रही है।

41 साल के डौंबुया फ्रेंच विदेशी फौज का हिस्‍सा रहे हैं और मास्‍टर कॉरपोरल की रैंक से वो स्‍पेशल फोर्स को कमांड करने तक की जिम्‍मेदारी संभालते रहे हैं।पेरिस स्थित कोले डी गुएरे वॉर कॉलेज से ग्रेजुएट होने वाले डौंबुया के पास 15 साल का मिलिट्री अनुभव है जिसमें कोटे डी आइवर, जिबूती, मध्‍य अफ्रीकी गणतंत्र, अफगानिस्‍तान और दूसरे क्षेत्रों में शामिल मिशंस का भी वो हिस्‍सा रहे हैं।

डौंबुया को डिफेंस मैनेजमेंट, कमांड और स्‍ट्रैटेजी का एक्‍सपर्ट माना जाता हैय़ कर्नल मामादी को कुछ लोग वॉर मास्‍टर के तौर पर भी बुलाते हैं।ले. कर्नल मामादी डौंबुया गिनी आर्मी के स्‍पेशल फोर्सेज ग्रुप के मुखिया हैं डौंबुया कांकन बॉर्डर के रहने वाले हैं और ये कोटे डी आइवर और माली के बीच पड़ता है। साल 2018 में डौंबुया पहली बार सुर्खियों में आए थे।

उस समय उन्‍हें कोनाकरि में हुई एक मिलिट्री परेड में देखा गया था। ये परेड देश की आजादी के 60वें वर्ष पर आयोजित की गई थी।हाल ही में जब स्‍पेशल फोर्सेज ग्रुप को तैयार किया गया तो डौंबुया को इसका जिम्‍मा सौंपा गया। इस स्‍पेशल फोर्स का गठन आ,तंकवाद और समुद्री डाकुओं से निपटने के लिए किया गया था।

तख्तापलट की वजह
लेफ्टिनेंट कर्नल मामादी को कोनाकरि के नेतृत्‍व से कुछ समस्‍या थी। डौंबुया चाहते थे कि स्‍पेशल फोर्सेज को रक्षा मंत्रालय से अलग कर स्‍वायत्‍ता दी जाए जबकि नेतृत्‍व इसके लिए तैयार नहीं था। गिनी आर्मी ने बताया कि राष्‍ट्रपति अल्‍फा कोंडे को हटाकर संविधान को भंग कर दिया गया है। स्‍पेशल फोर्सेज पर हालांकि सार्वजनिक प्रदर्शनों को दबाने के आरोप लग चुके हैं । डौंबुया ने फ्रांस 24 के सहयोगी आरएफआई को दिए इंटरव्‍यू में कहा है कि सेना कोई गेम नहीं खेलना चाहती है बल्कि देश के नागरिकों के की रक्षा करना चाहती है।पंजाब केसरी से सहभार