बिहार का लाल गोपाल बना देश का सबसे युवा वैज्ञानिक जिसने नासा तक के ऑफर को ठुकराया जानिए
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बिहार का लाल गोपाल बना देश का सबसे युवा वैज्ञानिक जिसने नासा तक के ऑफर को ठुकराया जानिए

देश और दुनिया के हर युवाओं का सपना होता है कि वह बड़े से बड़े कंपनी और संस्थान में काम करें और मोटी रकम कमाई करे खास तौर पर अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा में करीब करीब हर वैज्ञानिक का सपना होता है काम करने का लेकिन बिहार का एक ऐसा युवा वैज्ञानिक है जिसने नासा के ऑफर को कई बार ठुकरा चुका है.

यह देश के सबसे युवा वैज्ञानिक का भी उपाधि पा चुके हैं उन्होंने मात्र 20 साल की उम्र में ही कई बड़े अविष्कार किए हैं जिसके बाद इन्हें दुनिया भर में सराहा जा रहा है बिहार का यह युवा वैज्ञानिक को राष्ट्रीय यंगेस्ट साइंटिस्ट के रूप में भी जाना जाता है।

बाढ़ में सब कुछ हो गया बर्बाद तब पर भी हार नहीं मानी आपको बता दूं कि बिहार के भागलपुर जिले के धृबगंज गांव में 19 साल पहले किसान प्रेम रंजन के घर पैदा हुए गोपाल जी के बारे में किसी ने सोचा भी नहीं था कि वह 1 दिन दुनिया भर की सुर्खियों में रहेगा वजह यह है.

कि छोटी सी उम्र में गोपाल ने अपने प्रतिभा के पूरे अमेरिका में अपनी छाप छोड़ा है। हालांकि ऐसा नहीं था कि उसके लिए सब आसान था आपको बता दूं कि साल 2008 में आई बाढ़ में उनके गांव में तबाही मचाई और तब इनका सब कुछ बर्बाद हो गया तब भी इन्होंने हार नहीं मानी इस माहौल में भी गोपाल ने हिम्मत नहीं हारी।

2014 में गोपाल ने 10वी का परीक्षा दिया तभी उन्होंने बायो सेल की खोज की और इस खोज के लिए उन्हें इंस्पायर्ड अवार्ड से भी नवाजा गया है उन्होंने 2017 में प्रधानमंत्री मोदी से मिले और पीएम मोदी ने उन्हें एनआईएफ अहमदाबाद भेज दिया जहां उन्होंने कुल 24 अविष्कार की है आपको बता दूं कि गोपाल की गिनती दुनिया टॉप 30 स्टार्टअप साइंटिस्ट में भी होता है

गोपाल ने किए कई अविष्कार बिहार के युवा वैज्ञानिक ने अब तक कई अविष्कार किया है इसमें प्रमुख है हाइड्रोइलेक्ट्रिक बायो सेल यह ऐसा अविष्कार है जिसने इस डिवाइस से 50000 वोल्ट बिजली स्टोर किया जा सकता है जो अपने आप में बेहद खास है वहीं अविष्कार है पेपर बायो सेल पेपर बायो सेल जिसमें बेस्ट पेपर से बड़ी आराम से बिजली बनाई जा सकती है इसके अलावा जी स्टार पाउडर यह आविष्कार अपने आप में खास है क्योंकि इसे लगाकर 5000 डिग्री सेल्सियस का टेंपरेचर गेन किया जा सकता है ।

बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक आपको बता दूं कि अभी के समय में प्लास्टिक एक समस्या है इसी को ध्यान में रखते हुए गोपाल ने बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक का आविष्कार किया है सबसे खास बात यह है कि इसे केले के थंब से इस बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक बनाया गया है इसका इस्तेमाल करने के बाद यह खुद ब खुद खाद बन जाता है और बड़ी आसानी से खेतों में इसका इस्तेमाल होता है इसके नाथू ने कई बड़े अविष्कार किए हैं जिससे आने वाले समय में इसका इस्तेमाल आम इंसान की जिंदगी को बेहतर करने में लगाया जा सकता है।