बिहार के शहरी निकायों में बंपर वैकेंसी, आउटसोर्सिंग पर बहाल किए जाएंगे कर्मचारी
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बिहार के शहरी निकायों में बंपर वैकेंसी, आउटसोर्सिंग पर बहाल किए जाएंगे कर्मचारी

 

बिहार के 117 नए नगर निकायों में आउटसोर्सिंग पर बंपर बहाली होगी. नगर निकायों के नए कार्यालयों के लिए भी करीब एक हजार कर्मचारी आउटसोर्सिंग पर रखे जाएंगे. इसके अलावा नई नियुक्तियों में हजारों की संख्या सफाई कर्मचारियों की होगी. इसके अलावा नगर विकास एवं आवास विभाग ने सभी जिला पदाधिकारी, नगर आयुक्त और कार्यपालक पदाधिकारी को पत्र लिखकर इस बाबत आदेश जारी किया है. हर हाल में 31 मार्च, 2022 तक बहाली की प्रक्रिया पूरी कर लेने का निर्देश दिया गया है.

बता दें कि नए 117 नगर निकायों में खुलने वाले नए कार्यालयों में आइटी ब्वाय, कंप्यूटर आपरेटर, टैक्स कलेक्टर, अकाउंटेंट और सफाई निरीक्षण के पद के लिए आउटसोर्सिंग पर बहाली होगी. नगर पंचायतों में आठ जबकि नगर परिषद में अधिकतम 10 कर्मचारी रखे जाने हैं. इसके अलावा सभी निकायों में साफ-सफाई के लिए करीब तीन-चार हजार सफाईकर्मी एजेंसी के माध्यम से आउटसोर्सिंग पर रखे जा सकते हैं.

नए कार्यालय के लिए डीएम को नगर परिषद को न्यूनतम तीन और नगर परिषद को न्यूनतम दो कमरे वाला कार्यालय उपलब्ध कराना है. सरकारी भवन उपलब्ध नहीं होने पर नगर निकायों को किराये पर कम से कम पांच से छह कमरे वाला भवन लेना होगा. नगर परिषद के लिए निजी भवन का मासिक किराया अधिकतम 25 हजार जबकि नगर पंचायतों के लिए अधिकतम 20 हजार होगा. इसकी जवाबदेही अनुमंडल पदाधिकारी की होगी.

मानसून को देखते हुए सभी नए शहरी निकायों में अगले दो दिनों में नाला उड़ाही का काम शुरू करने को कहा गया है. आदेश में कहा गया है कि चूंकि आउटसोर्सिंग के माध्यम से सफाई कर्मचारी रखने में समय लग सकता है, इसलिए फिलहाल मूल प्रभार के नगर निकायों में सेवा देने वाली एजेंसी के माध्यम से साफ-सफाई और कूड़ा प्रबंधन के लिए मानव बल की व्यवस्था कर ली जाए. अगर इसकी सुविधा नहीं है, तो दैनिक भत्ते पर सफाई कर्मियों को रखा जाए.

मानसून में जलजमाव से बचाव के लिए नए नगर निकाय अति आवश्यक सिविल कार्यों पर अधिकतम पांच लाख रुपये तक खर्च कर सकेंगे. इसके अलावा साफ-सफाई के जरूरी उपकरणों की खरीद के लिए नगर परिषद अधिकतम डेढ़ लाख जबकि नगर पंचायत अधिकतम एक लाख रुपये खर्च कर सकेंगे. नए निकायों में फर्नीचर और अन्य उपस्करों के लिए नगर पंचायतों को अधिकतम दो लाख जबकि नगर परिषदों को अधिकतम तीन लाख रुपये खर्च करने की छूट दी गई है.