मुजफ्फरपुर जिले में इस बार भी बाढ़ से भीषण तबाही, 10 प्रखंडों की 3 लाख से अधिक की आबादी प्रभावित
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मुजफ्फरपुर जिले में इस बार भी बाढ़ से भीषण तबाही, 10 प्रखंडों की 3 लाख से अधिक की आबादी प्रभावित

मुजफ्फरपुर: उत्तर बिहार में लगातार हुई बारिश और नेपाल से आने वाले जल सैलाब ने तीन नदियों के जरिए इस बार भी मुजफ्फरपुर जिला बाढ़ की भीषण त्रासदी झेल रहा है. जिले में गंडक,बूढ़ी गंडक और बागमती नदी ने ऐसा जल तांडव मचाया है कि मुजफ्फरपुर के 10 प्रखंडों की तीन लाख से अधिक की आबादी इस वक्त बाढ़ का दंश झेलने को मजबूर है. जिले में आई भयावह बाढ़ में घर डूब गए,खेतो में लगी फसल नष्ट हो है वही सड़कों ने जलसमाधि ले ली है. हर साल की तरह इस साल भी एक बार फिर अभिशाप की तरह लाखो लोगों की ज़िंदगी की बाढ़ की चुनौती से निपटने की जद्दोज़हद में लगी हुई है. जहा लोग बाढ़ का पानी कम होने का आस लगाए अभी भी बांध और ऊंचे स्थलों पर शरण लिए हुए है.

हालांकि राहत कि बात यह है की लगातार खतरे के निशान से ऊपर बह रही नदियों के जलस्तर में अब कमी आ रही है. बूढ़ी गंडक ,बागमती और गंडक नदी के जलस्तर में कमी दर्ज हो रही है, वही बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर अभी खतरे के निशान से ऊपर है लेकिन उसमें भी गिरावट दर्ज हो रही है जिसके कारण लोगों ने राहत की सांस ली है. लेकिन अभी भी बाढ़ प्रभावित इलाकों में फसे लोगो की स्थिति दयनीय बनी हुई है.

वही मुजफ्फरपुर जिले में आए बाढ़ की विभीषिका से जुड़े सरकारी आंकड़ों पर गौर करे तो इस बार जिले के 10 प्रखंड के 97 पंचायत बाढ़ प्रभावित हुए है. जिसमें 11 पंचायत का सड़क संपर्क प्रखंड और जिला मुख्यालय से पूर्ण रूप से भंग रहा. इस वजह से तीन लाख से ज्यादा की आबादी इस साल बाढ़ से प्रभावित हुई है. लोग बेघर हो गए लोग ऊंचे स्थान पर शरण लेने को मजबूर हैं. इस दौरान जिला प्रशासन की ओर से आपदा में फसे लोगों के राहत और बचाव के लिए पर्याप्त व्यवस्था करने का दावा किया गया. लेकिन कई जगह पर अव्यवस्था भी साफ नजर आई.  हालांकि जिला प्रशासन ने दावा किया है कि बाढ़ पीड़ितों को हर संभव मदद पहुंचाई जा रही है.

वही बाढ़ में बेघर हुए लोग काफी परेशान है, कईयों की जमा पूंजी को बाढ़ ने डूबा दिया ,खेत खलियान पूरी तरह डूब गए है. जिले में आई भयावह बाढ़ से सब्जी की खेती करने वाले किसानों को काफी नुकसान हुआ है. जिनकी पूरी खेत और फसल बर्बाद हो गई है. वही कई परिवार ऐसे हैं जिनमें पुरुष सदस्य नहीं है वहां महिलाएं मायूस है महिलाएं रो रही है कि उनका दर्द भला कौन समझेगा और बाढ़ ने बर्बाद हुए उनकी जमा पूंजी को कौन देगा.

वही जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी कमल सिंह ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों को हर संभव मदद पहुंचाई जा रही है  पॉलीथिन शीट और सूखा राशन का वितरण किया जा रहा है जिले में बाढ़ पीड़ितों के लिए 113 जगह पर सामुदायिक किचन चलाए जा रहे हैं बाढ़ की स्थिति नियंत्रण में है नदियों का जलस्तर घट रहा है और पूर्व अनुमान के अनुसार बूढ़ी गंडक का जलस्तर भी खतरे के निशान के नीचे आ जाएगा.

गौरतलब है कि बाढ़ से हर साल यह इलाके प्रभावित होते हैं बाढ़ इन इलाकों में भीषण तबाही मचाती है लेकिन अभी तक इसका स्थाई समाधान नहीं हो पाया है जिसके कारण साल यह लोग हर साल बाढ़ का दंश झेलने को मजबूर है.