समस्तीपुर: चमकी बुखार को लेकर स्वास्थ्य महकमा अलर्ट, चिकित्सक सुबह 5 से शाम 6 तक ऐप पर दर्ज करेंगे उपस्थिति
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समस्तीपुर: चमकी बुखार को लेकर स्वास्थ्य महकमा अलर्ट, चिकित्सक सुबह 5 से शाम 6 तक ऐप पर दर्ज करेंगे उपस्थिति

 

चमकी बुखार से प्रभावित जिलों के अस्पतालों में 24 घंटे स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध रहेगी। ताकि मरीजों का समय पर इलाज हो सके। जिले के सभी पीएचसी में जेई/एईएस से बचाव हेतु सभी आवश्यक दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। आवश्यक दवाओं के साथ-साथ पैरासिटामोल, ओआरएस, विटामिन ए सहित ग्लूकोज भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रखने को कहा गया है।

विभाग ने अब अनुमंडलीय अस्पताल, रेफरल अस्पताल, सीएचसी व पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी की उपस्थिति सुबह 5 से शाम 6 बजे तक दर्पण डेली एप के माध्यम से दर्ज करने का निर्देश दिया है। इस संबंध में राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने पत्र जारी किया है। जिसमें जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी केयर इंडिया क सहयोग से सभी संबंधित संस्थानों के उपाधीक्षक एवं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों के मोबाइल पर दर्पण एप को इंस्टाल कर उन्हें एप के उपयोग कर स्वयं की उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया के लिए प्रशिक्षित कराने को कहा गया है। दर्पण डेली एप पर हाजिरी बनाने की व्यवस्था सिर्फ एईएस प्रभावित जिले में लागू की गई है। चिकित्सकों को इस एप को डाउनलोड करने का निर्देश दिया गया है।

समय पर इलाज करना जरूरी

गंभीर बीमारी चमकी से पीड़ित बच्चों को समय पर इलाज किया जाए तो वह पूरी तरह से ठीक हो जाते है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष की थीम चमकी की धमकी रखा गया है। इसमें तीन धमकियों को याद रखने की जरूरत है। जिसमें पहली यह है कि बच्चों को रात में सोने से पहले खाना जरूर खिलाएं। इसके बाद सुबह उठते ही बच्चों को भी जगाएं और देखें कि बच्चा कहीं बेहोश या उसे चमकी तो नहीं है। अंत में बेहोशी या चमकी दिखते ही तत्काल एंबुलेंस या नजदीकी गाड़ी से अस्पताल ले जाए। चमकी बुखार से पीड़ित बच्चों को अस्पताल पहुंचाने के लिए मुफ्त में एंबुलेंस सेवा दी जाती है। इसके लिए पीड़ित को 102 नंबर पर डायल कर एंबुलेंस बुलाना है।

इन चार बातों का रखें ध्यान

  • अपने-अपने बच्चों को रात में बिना खाना खिलाएं नहीं सोने दें।
  • बच्चों को रात में सोते समय अनिवार्य रूप से मीठा सामग्री खिलाएं।
  • चमकी के साथ तेज बुखार हो तो तुरंत डॉक्टर या मेडिकल स्टाफ से करें संपर्क।
  •  नजदीकी पीएचसी में ले जाकर समुचित उपचार कराएं।